आज ध्वज प्रणाम के समय मोदी जी के कांपते हाथों को किसने देखा ?
वह क्या था कुछ समझे..?
उन कांपते हाथों ने मुझे TV के सामने उन्हें करबद्ध प्रणाम करने पर मजबूर कर दिया। आंखें नम हो गई और भाव विभोर मन मोदी जी के चट्टानी संकल्प शक्ति को नमन करने पर मजबूर हो गया।
वो कंपकपाहट मोदी जी के भीतर उमड़ रहा उत्साह, आनंद, श्रद्धा, भक्ति और हिंदुत्व के पुनरुत्थान के हर्ष को रोके रखने के शरीर और आत्मा को द्वंद का प्रकटीकरण था।
हम कितने भाग्यशाली है कि हम उस कालखंड में जी रहे है जिसमें गुलामी का समूल नाश होते हम देख रहे है।
हम एक अवतार के साक्षी बन सके।
मोदी जी मानव नहीं महामानव है।
आज सम्पूर्ण सनातन समाज मोदी का ऋणी हो चुका हैं
सिर्फ स्वार्थी, सत्तालोलुप और संक्रमित दूषित रक्त से सिंचित नाम मात्र के सनातनियों को छोड़कर।
