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भारत में वोट शुद्धि SIR के द्वारा

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#वोट शुद्धि

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किसी बायोमेट्रिक और डिजिटल रिकॉर्ड के अभाव में आम भारतीय कितना कुटिल हो सकता है यह सब मैंने अपनी आँखों से देखा है। यही निष्कपट भोलाभाला आदमी प्राथमिक विद्यालयों में अपने एक ही बच्चे को चार-चार विद्यालयों में मज़े से दाखिला दिलाए रखता था ताकि उसका बच्चा उसके लिए चार जगहों से सरकारी इमदाद का माध्यम बन सके!

सरकारी कोष अनंत काल तक इस चोरी की जानबूझ कर अनदेखी नहीं कर सकता। इसे ‘फिसकल प्रूडेंस’ कहें याकि कुछ और कह लें लेकिन इतना तो तय है कि कोई भी सरकारी सहायता जरूरतमंद तक पारदर्शी तरीके से ही पहुंचनी चाहिए।

वर्तमान सरकार में तंत्र ने प्रारम्भ से ही ‘घोस्ट बेनिफिशरीज़’ पर नकेल कसने की मुहिम चालू की है, यह मैं बहुत दिनों से देख और महसूस कर रहा हूँ।

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लोकतंत्र का आधार है मतदाता! क्या हो अगर मतदाता ही बोगस अथवा फ़र्ज़ी हों? क्या हो अगर एक व्यक्ति चार-चार जगहों से मतदान कर दे और दूसरा व्यक्ति कहीं भी मतदान न करे और उसके नाम पर कोई दूसरा आदमी मतदान कर आवे? क्या हो अगर कोई अभारतीय भी यहाँ के लोकतंत्र का नियंता बन जाए?

चुनाव दर चुनाव मैंने देखा है उन छितराती दलीलों को कि बहुमत प्राप्ति से बनी सरकार महज चालीस प्रतिशत लोगों के पसंद की सरकार है!

क्या सच?

विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान अगर आपने सबकुछ बूथ लेवल ऑफिसर महोदय के ऊपर नहीं छोड़ दिया होगा एवं आपने 2003 की मतदाता सूची अगर देखी होगी तो आपने भी यह प्रश्न खुद से अवश्य पूछा होगा,

क्या यह धोखाधड़ी 2003 तक इतनी ही आसान थी?

सूची में देखिये और देखिये कि वहाँ ‘घोस्ट वोटर्स’ की भरमार है साहब! सम्भव है कि आपके मामा-मामी से लेकर न जाने कितने दूर-दराज के लोग उस दौर में आपके घरों से वोटर बने बैठे रहे हों? जानते हैं इसका अगला चरण क्या होता रहा होगा? ‘वोटर इंपर्सनेशन’ अर्थात फ़र्ज़ी वोटिंग! क्या ऐसे वोटर्स को मतदाता सूची से हटा देना वोट चोरी है अथवा वोट शुद्धीकरण?

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विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण इसलिए भी आवश्यक है कि एक वोट का अर्थ वास्तव में एक ही वोट हो, न इससे कम न इससे अधिक और इसलिए भी कि भारत भाग्य विधाता अपनी वंश परम्परा में असल भारतीय हो! याद रखिये केवल भारतीय!

SIR का विस्तार Special Intensive Revision भर मत समझिये यह वास्तव में Securing India Rigorously भी है। यह भी मत समझिये कि यह अभियान किसी वर्ग विशेष को संतुष्ट या किसी की छंटनी करने का प्रयास है बल्कि यह वास्तव में ऐसा महायज्ञ है जिसका साध्य है ‘एक भारतीय एक वोट!’ और इस साध्य में भारतीय होना वोट होने की प्राथमिक शर्त है!

अगर आप अपनी भारतीयता सिद्ध नहीं कर पाते हैं तो आपको यहाँ के लोकतंत्र में हितधारक बनने का अधिकार नहीं हैं। यह प्रगाढ़ पुनरीक्षण इसकी स्पष्ट उद्घोषणा है।

मान कर चलिए कि आपके मतदाता पहचान पत्र की भविष्य में बहुत दमदार स्थिति होने वाली है।

http://भारत में वोट शुद्धि SIR के द्वारा

 

 

 

 

SO, SIR IS A MUST!

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प्रगाढ़ पुनरीक्षण को लीजिये और इसके साथ रख कर देखिये भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की सख़्ती!

हर पुराने आधार होल्डर को नए सिरे से अपने अभिलेखों को पुनः सत्यापित करने को कहा गया है। यह सुविधा अभी निःशुल्क है, कितने लोग अपने अभिलेख अपलोड कर चुके होंगे? क्या आपको ज्ञात है कि कूट रचित अभिलेखों पर निर्गत आधार को प्राधिकरण द्वारा कठोरता से निरस्त किया जा रहा है?

इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम उत्पाद जानते हैं?

‘सुपात्र भारतीयों का ट्रू डाटा सेट!’

क्या ऐसा होना गलत होगा?

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बात किसी राजनीतिक दल के समर्थन अथवा विरोध की है ही नहीं, बात बस यह है कि एक संवैधानिक निकाय द्वारा जो हो रहा है क्या वह उचित है?

लोग कुछ भी समझें मेरे लिए यह पुनरीक्षण किसी राजनीतिक दल का स्वार्थपरक अभियान नहीं अपितु एक स्वतन्त्र संवैधानिक निकाय द्वारा लोकतंत्र के शुद्धीकरण हेतु आयोजित समुद्र मंथन है जिसे मैं उचित भी मानता हूँ और यह भी कि यह कोई भी सरकार या सरकारी निकाय करे, उसे इस महान कृत्य हेतु समर्थन मिलना ही चाहिए!

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हममें से अधिकांश वास्तव में अभी इस महायज्ञ का असल उद्देश्य समझ ही नहीं पाए हैं। बूथ लेवल ऑफिसर्स को भी बहुधा यह ज्ञात नहीं कि वे किस पुण्य कार्य के भागी हैं। हर महान कार्य की तरह यह कार्य भी दुष्कर है और समस्या यह है कि उनकी वाजिब समस्याओं का जिक्र भी हो तो अतिउत्साही और आक्रामक जनसमूह उन्हें गालियां देने लग जाता है जबकि तंत्र की सुचारु व्यवस्था हेतु खामियों को स्वीकार कर उनपर सुधारात्मक कार्य करना सही तरीका है।

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पोस्ट लम्बी हुई, अब विराम! कहना बस यह कि तमाम शिकायतों और अपनी आक्रामक तर्कणा को किनारे धर हम सभी को इसे सफल बनाना है। एक नागरिक के तौर पर अगर कर सकें तो लोगों का सहयोग करें, सही जानकारी साझा कर उनके अभिलेख दुरुस्त करवाएं ताकि लोकतंत्र में कोई भी वैध आवाज़ ज़रा सी चूक से गूंगी बनने को विवश न हो जाय!

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